संस्थापक का संदेश
विश्व शांति के लिए सवा लाख भगवान शिव मंदिर निर्माण अभियान
मेरे प्यारे देशवासियो, श्रद्धालु साथियो, माताओं, बहनों, युवाओं और मानव कल्याण में विश्वास रखने वाले सभी सज्जनों को मेरा प्रेमपूर्ण प्रणाम।
आज संपूर्ण विश्व एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ भौतिक प्रगति तो बहुत हुई है, लेकिन मनुष्य के भीतर शांति, संतोष और आध्यात्मिक स्थिरता कम होती जा रही है। परिवारों में तनाव, समाज में विभाजन, मानव हृदय में अशांति, प्रकृति में असंतुलन और जीवन में बढ़ती हुई दौड़ ने मनुष्य को भीतर से कमजोर कर दिया है। ऐसे समय में केवल बाहरी विकास पर्याप्त नहीं है; आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य का मन शांत हो, उसका हृदय पवित्र हो, उसकी सोच सत्य पर आधारित हो और उसका जीवन परमात्मा की ओर उन्मुख हो। इसी पवित्र भावना के साथ रूहानी सच नाम सत्संग (रजि.) की ओर से विश्व शांति के लिए सवा लाख भगवान शिव मंदिर निर्माण अभियान का संकल्प लिया गया है।
बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से आता है कि इस अभियान में विशेष रूप से भगवान शिव मंदिर ही क्यों बनाए जा रहे हैं, अन्य देवी-देवताओं के मंदिर क्यों नहीं। मैं इस विषय को पूर्ण श्रद्धा और स्पष्टता के साथ कहना चाहता हूँ कि हमारा उद्देश्य किसी भी देवी-देवता, मत, पंथ या पूजा-पद्धति का भेद करना नहीं है। हम सभी देवी-देवताओं का पूर्ण सम्मान करते हैं, क्योंकि सभी दिव्य शक्तियाँ उसी एक परम सत्य की विविध अभिव्यक्तियाँ हैं। किंतु इस अभियान में भगवान शिव को विशेष रूप से इसलिए केंद्र में रखा गया है, क्योंकि शिव स्वयं कल्याण, शांति, करुणा, त्याग, तप और विश्व मंगल के प्रतीक हैं।
भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है — वे सहज प्रसन्न होने वाले, भक्तवत्सल, दयालु और संपूर्ण सृष्टि के कल्याणकारी स्वरूप हैं। शिव का एक नाम नीलकंठ भी है, क्योंकि उन्होंने संसार की रक्षा के लिए विष को अपने कंठ में धारण किया। यह संदेश अत्यंत गहरा है — जो समस्त संसार के दुख, विष, तनाव और अशांति को स्वयं सहकर भी जगत का कल्याण करें, वही शिव हैं। आज जब विश्व में हिंसा, घृणा, लोभ, क्रोध, भ्रम, मानसिक तनाव और अस्थिरता बढ़ रही है, तब भगवान शिव की शीतल, शांत और मंगलकारी उपासना अत्यंत आवश्यक हो जाती है।
इसीलिए हमारा यह संकल्प केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी आध्यात्मिक भावना है। हमारा उद्देश्य है कि हर गाँव, हर वार्ड, हर क्षेत्र में ऐसे पवित्र शिव मंदिर स्थापित हों, जहाँ अधिक से अधिक शिव भक्त श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ शिवलिंग पर दूध, कच्ची लस्सी, जल एवं बेलपत्र का अभिषेक करें। यह अभिषेक केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक साधना है। जल शीतलता और जीवन का प्रतीक है, दूध पवित्रता और कोमलता का, कच्ची लस्सी सरलता और ग्रामीण सात्विकता का, तथा बेलपत्र भक्ति, समर्पण और शिव प्रिय अर्पण का प्रतीक है।
जब श्रद्धालु शिवलिंग पर इन पवित्र पदार्थों से अभिषेक करते हैं, तब उसके पीछे केवल कर्मकांड नहीं होता, बल्कि यह भाव होता है कि —
हे भोलेनाथ! जैसे यह जल, दूध और लस्सी आपको शीतलता अर्पित कर रहे हैं, वैसे ही आप समस्त विश्व की अशांति को शांति में बदल दें; मानव हृदयों के क्रोध को करुणा में बदल दें; द्वेष को प्रेम में बदल दें; हिंसा को सद्भाव में बदल दें।
हमारी यही भावना है कि अधिक से अधिक शिव भक्त निरंतर अभिषेक करें, भगवान शिव प्रसन्न हों, उनका शांत और कल्याणकारी स्वरूप जग में प्रकट हो, और विश्व में शांति, करुणा, सद्भाव तथा धर्ममय जीवन की स्थापना हो।
शिवलिंग स्वयं भी अत्यंत गहन आध्यात्मिक प्रतीक है। यह निराकार परम तत्व की अनुभूति का प्रतीक है। शिवलिंग हमें यह स्मरण कराता है कि परमात्मा किसी सीमित रूप में बँधा नहीं, बल्कि वह अनंत, सर्वव्यापक और सर्वकल्याणकारी सत्ता है। इसलिए शिव की उपासना केवल बाहरी पूजा नहीं, बल्कि अंतर्मन की शुद्धि, विचारों की पवित्रता और जीवन की दिशा को सत्य की ओर मोड़ने का मार्ग भी है।
हम चाहते हैं कि ये मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान न बनें, बल्कि शांति, प्रार्थना, सिमरन, सेवा, नैतिकता और मानव एकता के केंद्र बनें। जहाँ लोग बैठकर विश्व शांति की प्रार्थना करें, आत्मिक जीवन की प्रेरणा लें, बुराइयों से दूर हों, नशामुक्त जीवन अपनाएँ, माता-पिता का सम्मान करें, गरीब और दुखी जनों की सेवा करें, और मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने का संदेश प्राप्त करें। जब मंदिर समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं, तब वे केवल भवन नहीं रहते — वे युग परिवर्तन के केंद्र बन जाते हैं।
इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि हम इसे जन-जन की भागीदारी से आगे बढ़ाना चाहते हैं। यदि कोई श्रद्धालु भूमि दान करना चाहता है, तो वह अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार इस पवित्र मिशन में सहयोग कर सकता है। हमारी भावना यह है कि हर क्षेत्र में भगवान शिव का एक ऐसा केंद्र हो, जहाँ लोग विश्व शांति के लिए एकत्रित होकर भक्ति और प्रार्थना कर सकें। यह कार्य किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के कल्याण का कार्य है।
मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यह अभियान किसी संकीर्ण सोच, प्रचार या दिखावे का अभियान नहीं है। यह एक आध्यात्मिक जन-जागरण अभियान है, जिसका मूल उद्देश्य है —
विश्व शांति, मानव कल्याण, प्रकृति संरक्षण, मनुष्य के भीतर की पवित्रता, और परमात्मा के प्रति सच्ची भक्ति।
आज संसार को सबसे अधिक आवश्यकता शांति की है, और सच्ची शांति भीतर से आती है। जब मनुष्य का मन शांत होगा, तभी परिवार शांत होगा; परिवार शांत होगा, तभी समाज शांत होगा; समाज शांत होगा, तभी राष्ट्र शांत होगा; और राष्ट्र शांत होंगे, तभी विश्व शांति संभव होगी। इसीलिए हमारा यह संकल्प ईंट-पत्थर का नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर शिवतत्त्व जगाने का संकल्प है।
मैं आप सभी से विनम्र प्रार्थना करता हूँ कि इस मिशन को समझें, अपनाएँ और अपनी श्रद्धा के अनुसार इसमें सहयोग दें। जहाँ भी संभव हो, भगवान शिव मंदिर निर्माण, अभिषेक, प्रार्थना, सिमरन और सेवा के माध्यम से इस विश्व शांति अभियान का हिस्सा बनें। आइए, हम सब मिलकर भगवान शिव के चरणों में यह प्रार्थना करें कि वे प्रसन्न हों, शांत हों, कृपा करें, और इस पृथ्वी पर शांति, प्रेम, दया, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश की वर्षा करें।
मेरी परम पिता परमात्मा से यही प्रार्थना है कि भगवान शिव की कृपा से यह पवित्र अभियान सफल हो, मानवता में प्रेम बढ़े, समाज में सद्भाव स्थापित हो, प्रकृति संतुलित हो, और संपूर्ण विश्व में शांति का दिव्य प्रकाश फैले।
ॐ नमः शिवाय।
ॐ तत् सत्।
Baldev Singh Maharaj
Founder, Ruhani Sach Naam Satsang (Regd.)
